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अनूषा मिश्रा: 'फ्रौम फ्लैब टू फैब'- सब नज़रिए की बात है

मोटी, गोलमटोल, लड्डू, फुटबॉल.... ये कुछ ऐसे नाम हैं जिनसे लोग मुझे बुलाया करते रहे है। हाँ, आपने बिलकुल सही अनुमान लगाया। मैं मोटी हूँ , इससे भी बड़ी और बुरी बात यह है कि मैं एक जवान, कुंवारी लड़की हूँ, जो कि मोटी है। समाज को इस बात से बहुत अधिक दिक्कत है, क्यों? क्योंकि मोटे लोग केवल उपहास उड़ाने और मजाक बनाने के लिए ही होते हैं। हमें यही सिखाया गया है, क्या ऐसा नहीं है? हम टुनटुन पर हंसे, हम गुड्डी मारुती पर हंसे, हम भारती सिंह पर भी हंसे। क्यों? क्योंकि यह सभी मोटी महिलाएं है, उनके मोटापे के चलते उन्हें स्त्री कम और मजाक का पात्र अधिक समझा गया।

हम भारी-भरकम आर्म्स और मोटी जांघों तथा बाहर निकले हुए पेट को देखते हैं और हमें उनसे घृणा महसूस करना सिखाया जाता है। युवा लड़कियों को हमेशा परफेक्ट शेप वाली लड़की की ओर देखने के लिए कहा जाता है। लडकियां अपनी पसंद से नहीं बल्कि समाज की पसंद से, समाज के दबाव के अनुसार होनी चाहिए। लड़कियों के इस लोगों द्वारा पसंद किए जाने वाले समूह का हिस्सा बनने के लिए युवा लड़कियों पर बहुत दबाव होता है, और वे बेहद कम उम्र से ही खुद को भूखा रखने लगती है। अपने शरीर में इस युवावस्था और किशोरावस्था में होने वाले ये सभी परिवर्तन काफी डिप्रेस कर देने वाले होते हैं। यह कुछ ऐसा है जिससे मैं भी कुछ सालों पहले गुजरी हूँ। बेहद कम समय में ही हेक्टिक वर्क शेड्यूल और अनियमित खान-पान के चलते मेरा वजन बहुत बढ़ गया, जिसके कारण मुझे उदासी और तनाव में रहना पड़ा। मैं क्योंकि खुद इन हालातों से गुजरी हूँ तो मैं जानती हूँ कि इस परिस्थिति से निपटना आसन नहीं होता है। ख़ास तौर से यह तब आसान नहीं होता जब कि आप मोटापे से अपनी लड़ाई लड़ रहे हों और आपके नजदीकी लोग ही आपके खिलाफ बातें करते हो। लेकिन मैं उस सब से ऊपर उठ गई, क्योंकि मुझे पता था कि क्या ध्यान देने लायक है और क्या नहीं है और सभी युवा लड़कियों के लिए ठीक यही मेरा संदेश है।

हमारा शरीर हमारा गर्व है और हमें इसे हमेशा स्वीकार करना चाहिए। जहां एक तरफ लोग आपके पास आएँगे और आपको यह बताएंगे कि आपका शरीर परफेक्ट नहीं है, वहीं आपको उन लोगों को सिरे से अनदेखा करना होगा। सबसे जरुरी यह है कि आप अपने शरीर के साथ कम्फर्टेबल हो। मेरे वजन को लेकर हमेशा ही मेरी माँ और कई चिंतित आंटियों ने चिंता जताई और मुझे कहा कि तुम काफी बदल गई हो। मैं जानती थी कि उनका यह कहने का आशय ये था कि, -तुम बहुत मोटी हो गई हो। लेकिन मैनें कभी उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि मैं अपने शरीर को लेकर कॉंफिडेंट थी। मेरा शरीर जैसा भी है, मैं उससे प्यार करती हूँ। यहाँ तक कि अपने इसी शरीर के चलते मुझे अभिनेत्री बनने का यह सुनहरा मौक़ा मिला। सोनी सब के शो ‘तेरा क्या होगा आलिया’ में मेरे इसी मोटे शरीर के कारण मुझे लीड रोल मिला। और इमानदारी से कहूं तो, इससे अधिक कोई और बात मुझे खुश नहीं कर सकती।