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अजमेर के डॉक्टरों ने कर दिया कमाल, 252 में से 201 पॉजिटिव मरीज ठीक हुए

अजमेर के डॉक्टरों ने कर दिया कमाल, 252 में से 201 पॉजिटिव मरीज ठीक हुए

अजमेर के डॉक्टरों ने कर दिया कमाल, 252 में से 201 पॉजिटिव मरीज ठीक हुए

एसपी मित्तल 

अजमेर के जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के डॉक्टरों ने कमाल कर दिया है। पिछले दो माह में अजमेर में 252 पॉजिटिव मरीज दर्ज किए गए। लेकिन 19 मई तक 201 मरीजों को ठीक कर दिया गया। अधिकांश मरीजों को उनके घर या फिर क्वारंटीन सेंटर में भेजा गया है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज के लिए बनाए गए जेएलएन अस्पताल में अब मात्र 51 पॉजिटिव मरीज रह गए हैं। 

संभवत: पूरे प्रदेश में अजमेर में मरीजों के ठीक होने की दर सबसे ज्यादा है। 19 मई के ठीक हुए मरीजों की संख्या को भी शामिल कर लिया जाए तो रिकवरी का प्रतिशत 79 है। रिकवरी के इतने अधिक प्रतिशत से जेएलएन अस्पताल के सभी चिकित्सक गदगद हैं। अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीर बहादुर सिंह ने कहा कि यह सफलता डॉक्टरों की टीम भावना से मिली है। 

उन्होंने कहा कि चिकित्सा कर्मियों के साथ अस्पताल के डॉक्टरों ने जो रात दिन मेहनत की उसी का परिणाम है कि अब अस्पताल में मात्र 51 मरीज रह गए हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि ठीक होने वाले मरीजों की संख्या को देखते हुए अब अस्पताल में अन्य बीमारियों के मरीजों के इलाज को और गति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जेएलएन अस्पताल अजमेर संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल है। इसलिए यहां मरीजों की संख्या भी अधिक रहती है। 

रेड जोन से बाहर आ सकता है अजमेर:

केन्द्र सरकार ने पूर्व में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या को ध्यान में रखते हुए अजमेर को रेड जोन घोषित किया था। जेएलएन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनिल जैन ने बताया कि पूर्व में 150 पॉजिटिव मरीजों को देखते हुए अजमेर को रेड जोन की श्रेणी में रखा गया था। लेकिन बाद में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने श्रेणी विभाजन का अधिकार राज्य सरकार को दे दिया। 

अब यदि पुराने फार्मूले के नजरिए से भी देखा जाए तो अजमेर में पॉजिटिव मरीजों की संख्या मात्र 51 रह गई है। ऐसे में अजमेर को रेड जोन से बाहर किया जा सकता है। डॉ. जैन ने कहा कि अजमेर के डॉक्टरों की यह बहुत बड़ी उपलब्धि है कि रिकवरी का प्रतिशत बहुत ज्यादा है। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक और पॉजिटिव मरीजों के इलाज में जुटे डॉक्टर अनिल सांवरिया ने कहा कि चिकित्सकों ने सेवा की भावना से काम किया है, इसलिए अजमेर में रिकवरी का प्रतिशत बहुत ज्यादा है। अनेक डॉक्टर पिछले तीन माह से अपने घर नहीं गए हैं। 

नए केस की संख्या भी घटी:

जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. केके सोनी ने बताया कि यह संतोष जनक बात है कि अजमेर में पिछले तीन-चार दिनों से नए केस में वृद्धि भी नहीं हो रही है। पिछले तीन चार दिनों में एक या दो नए केस ही सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह लोगों की जागरुकता है कि जिले भर में संक्रमित मरीजों की संख्या ज्यादा नहीं बढ़ रही है। 

डॉ. सोनी ने कहा कि जो प्रवासी श्रमिक अजमेर में बाहर से आ रहे हैं, उन पर निगरानी रखने की सख्त जरूरत है। बाहर से आने वाले श्रमिकों को स्वयं कोरोना टेस्ट करवाना चाहिए। डॉ. सोनी ने 51 पॉजिटिव मरीजों के रहने पर जिले भर के सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह सम्पूर्ण स्वास्थ्य विभाग के लिए खुश खबरी है। सभी की मेहनत रंग लाई है। 

असमंजस की स्थिति:

लॉकडाउन के दौरान जरुरत मंद व्यक्तियों के नाम खाद्य सुरक्षा योजना में जुड़वाने को लेकर जिले भर में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। 19 मई को अखबारों में कलेक्टर के हवाले से खबर छपी की जिन जरुरतमंद व्यक्तियों के नाम खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल नहीं है। वे अपने क्षेत्र के बीएलओ से सम्पर्क कर अपना नाम सूची में जुड़वा सकते हैं। 

कलेक्टर के इस कथन के बाद अनेक जरुरतमंद लोगों ने क्षेत्र के बीएलओ से सम्पर्क किया। लेकिन बीएलओ ने सर्वे सूची में नाम लिखने से मना कर दिया। शहर के पार्षद नीरज जैन चन्द्रेश सांखला, भवानी सिंह जेदिया, वंदना नरवाल आदि ने कहा कि बीएलओ के पास कलेक्टर का कोई आदेश नहीं है, इसलिए सर्वे सूची में नाम नहीं जोड़ा जा रहा है। पार्षदों ने स्वयं भी बीएलओ से सम्पर्क किया। 

इस संबंध में प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि जल्द ही लिखित आदेश सभी बीएलओ के पास भिजवा दिए जाएंगे। सर्वे सूची में नाम जुड़वाने का काम राज्य सरकार दिशा निर्देश के अनुरूप ही होगा। उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन के दौरान ऐसे बहुत से परिवार सामने आए जिन्हें किसी भी योजना में लाभ प्राप्त नहीं हो रहा है। ऐसे वंचित परिवारों को ही राशन सामग्री उपलब्ध करवाने के लिए कलेक्टर ने आदेश दिए हैं। जरुरतमंद व्यक्ति रसद विभाग के कंट्रोल रूम के टेलीफोन नम्बर 0145-2627391 पर सम्पर्क कर सकते हैं। 

संवाददाता शोएब म्यानुंर की रिपोर्ट