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मुंबई: संगीतकार रफीक राजा - मोहम्मद अज़ीज़ से लेकर जावेद अली जैसे सिंगर्स के साथ काम कर चुके हैं, इस साल चार फिल्मे रिलीज के लिए तैयार

मुंबई: संगीतकार रफीक राजा - म्युजिक जिनके खून में है मोहम्मद अज़ीज़ से लेकर जावेद अली जैसे सिंगर्स के साथ काम कर चुके हैं, इस साल चार फिल्मे रिलीज के लिए तैयार


मोहम्मद अज़ीज़ से लेकर जावेद अली जैसे सिंगर्स के साथ काम कर चुके रफीक राजा की इस साल चार फिल्मे रिलीज के लिए तैयार 

रफीक राजा बॉलीवुड के एक ऐसे संगीतकार हैं जो हर प्रकार का संगीत देने में माहिर माने जाते हैं. उनका असली नाम तो अब्दुल रफीक है मगर फ़िल्मी लोगों ने उन्हें रफीक राजा बना दिया. राजस्थान के बीकानेर से सम्बन्ध रखने वाले रफीक राजा के खून में है म्युज़िक या यूँ कहें कि उन्हें विरासत में यह कला मिली है. उनकी पीढ़ी दर पीढ़ी संगीत के क्षेत्र में रही है. इनके सगे फूफा गुलाम मोहम्मद साहेब फिल्म पाकीज़ा के संगीतकार थे. उनके सगे चाचा कमल राजस्थानी ने सिंगर अनवर को पहला ब्रेक दिया था और फिल्म मेरे गरीब नवाज़ से जुड़े थे. मामा चाँद परदेसी भी संगीतकार रहे हैं, रतनदीप हेमराज भी इनके मामा हैं. सरदार बीकानेरी और जमीर बीकानेरी भी इनके कजन हैं. इनके पिता श्री सरकारी सर्विस में थे, लेकिन संगीत सुनने का उन्हें भी शौक था. घर में ही गीत संगीत का माहौल था. इनके उस्ताद रफीक सागर साहेब थे जिनसे इन्होने संगीत की तालीम हासिल की. बकौल रफीक राजा ''मैं उन्हें अपना गुरु मानता हूँ उन्ही की दुआओं से मैंने यह मुकाम हासिल किया है.''  इनका पहला अलबम भजन का एल्बम था, जो दस बारह साल पहले आया था, इनके एक दोस्त रायटर पंचम सिंह ने इन्हें संगीतकार बनाया.  

मुंबई में आकर रफीक राजा ने बतौर सिंगर लाइव शोज़ से शुरुआत की. मोहम्मद रफ़ी साहेब के गाने वह स्टेज पर गाते थे. मेहदी हसन, गुलाम अली साहेब की गजलों को भी खूब गाया, आज भी रफीक राजा शोज़ करते रहते हैं. अब तक इनके दो दर्जन से ज्यादा अलबम रिलीज हो चुके हैं. इनकी अबतक दो फिल्मे रिलीज हो चुकी हैं और चार फिल्मे रिलीज होने वाली हैं. जिंदगी एक नशा है और 'कुछ करो ना' जैसी फिल्मो में संगीत दे चुके रफीक राजा की आने वाली फिल्मो में 'तेरी सूरत निगाहों में है', 'ब्रेक डाउन, 'औलाद' और 'एक दीवाना ऐसा भी' शामिल हैं. हाल ही में इन्होने तीन फिल्मे साइन की हैं. 

फिलहाल इंडस्ट्री में बतौर कम्पोजर काम कर रहे हैं. बकौल रफीक ''मैंने कभी जिंदगी में सोचा नहीं था कि मेरी धुनों पर मोहम्मद अज़ीज़, शब्बीर कुमार, कुमार शानू, अलका याग्निक, साधना सरगम, शान, जावेद अली जैसे सिंगर्स गायेंगे, लेकिन मैं इन सभी गायकों को गवा चूका हूँ.'' हाल ही में गजल का एक अलबम रिलीज हुआ है जिसमे न सिर्फ रफीक राजा कम्पोजर हैं बल्कि सिंगर भी हैं. अलबम का नाम है दर्द का पत्थर, इसे ऑडियो करी कंपनी ने जारी किया है. 

रफीक राजा अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहते हैं ''जिस तरह लक्ष्मीकांत प्यारेलाल काम करते थे मैं उसी स्टाइल में काम करता हूँ. मैंने लक्ष्मीकांत प्यारेलाल को बहुत फोल्लो किया है. मुंबई के महबूब स्टूडियो में जब लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की कोई रिकॉर्डिंग होती थी, तो मैं सुबह दस बजे से अपने जीजा जी रौशन अली के साथ वहां चला जाता था और दिन भर बड़े गौर से रिकॉर्डिंग के पूरे प्रोसेस को देखता सुनता समझता था, मुझे लगता है कि लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की रिकॉर्डिंग को सुनना मेरे संगीतकार बनने में एक बड़ा योगदान रहा. उन्ही को सुनकर देखकर मुझे संगीतकार बनने का जूनून हुआ. मुझे लिरिक्स पर धुन बनाने में मजा आता है. पहले के गीतकार संगीतकार के हाथ में लिरिक्स दे देते थे, वे इन्हें कम्पोज करते थे और वही बेस्ट गीत तैयार होता था. इसीलिए मैं राईटिंग के कमाल को मानता हूँ. मुझे लगता है कि सबसे बड़ा योगदान एक गीतकार का होता है, गीत लिखा अच्छा नहीं होगा तो उसकी धुन भी अच्छी नहीं बन पाएगी और जब धुन बेहतर नहीं होगी तो सिंगर गायेगा क्या? दस बहाने जैसे गाने लिखने वाले गीतकार पंछी जालौनवी के साथ भी मैं काम कर चूका हूँ.''

रफीक राजा आगे बताते हैं ''जिन गीतों की धुन कुछ मिनट में तैयार होती है वही हिट होते हैं. मैं अक्सर दस पन्द्रह मिनट में धुन बना लेता हूँ और मैं इसे उपरवाले का करम मानता हूँ. आज के दौर के हिसाब से मैं और गाने तैयार कर रहा हूँ.''

संगीतकार रफीक राजा को कई अवार्ड्स से सम्मानित किया जा चूका है जिनमे से 'भारत रत्न डॉक्टर आंबेडकर अवार्ड 2019' विशेष रूप से उल्लेखनीय है जो उन्हें दिल्ली में दिया गया था. यह अवार्ड रवि किशन, क्रिकेटर आरपी सिंह इत्यादि को भी दिया गया था. 

फ़िलहाल वह कई प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं. रफीक कहते हैं ''बहुत अच्छे गीतकार गाज़ी मोईन साहेब के साथ मैं एक गजल के एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहा हूँ.''


रिपोर्टर शमा ईरानी मुंबई